Sita Ko Dekhe

Poetry, Suresh Wadkar, Zehra Nigah, Uttam Singh

आह आ आ आ आ आ आ
आह आ आ आ आ आ आ
आह आ आ आ आ आ आ
आह आ आ आ आ आ आ
तक दिन दिन तक दिन दिन

सीता को देखे सारा गाँव
आग पे कैसे धरेगी पाँव
बच जाए तोह देवी मा है
जल जाए तोह पापन
जिसका रूप जगत की ठंडक
अग्नि उसका दर्पण
सब जो चाहे सोचे समझे
लेकिन वह भगवान्
सब जो चाहे सोचे समझे
लेकिन वह भगवान्
वह तो खोट कपट के बैरी
वह कैसे नादान
वह कैसे नादान

अग्नि पर उतरके सीता
जीत गयी विश्वास

देखा दोनों हाथ बढाए
राम खड़े थे पास
देखा दोनों हाथ बढाए
राम खड़े थे पास
उस दिन से संगत में आया(उस दिन से संगत में आया)
उस दिन से संगत में आया(उस दिन से संगत में आया)
सच मुच का वनवास(सच मुच का वनवास)
सच मुच का वनवास(सच मुच का वनवास)
सच मुच का वनवास(सच मुच का वनवास)

Curiosités sur la chanson Sita Ko Dekhe de Sadhana Sargam

Qui a composé la chanson “Sita Ko Dekhe” de Sadhana Sargam?
La chanson “Sita Ko Dekhe” de Sadhana Sargam a été composée par Poetry, Suresh Wadkar, Zehra Nigah, Uttam Singh.

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